आलेख

  खिलावन चंद्राकर

भोपाल।पचमढ़ी के रविशंकर भवन मैं 16 अगस्त 2016 की तारीख से कल 10 जून के की तुलना करें तो पता चलता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लगाया गया आम का एक पौधा अब फल देने लगा है। यह महज 4 साल 9 माह और 26 दिन का अंतर नहीं है। कल परिवार के साथ पचमढ़ी प्रवास पर खुद के द्वारा लगाए गए आम के पेड़ और उसमें लगे फल के साथ ही  बड़कछार के विशाल क्षेत्र में फैले हुए वटवृक्ष की जड़ों को दिखाकर भी संदेश दिया कि उनकी जड़ें भी मध्यप्रदेश में इसी तरह फैली हुई है।शिवराज सिंह ने सोशल मीडिया में शेयर की उसमें एक संदेश और उनके विरोधियों द्वारा मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की तथाकथित कोशिशों पर करारा तमाचा भी है।
उन्होंने आम का फल दिखाते हुए कहा कि  मेहनत का फल इसे कहते हैं। इसके माध्यम से शिवराज सिंह ने एक तरफ तो अपने अभियान पर्यावरण सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संदेश दिया ,वही अप्रत्यक्ष रूप से यह जताने की कोशिश भी की है ,की जब मध्य प्रदेश में भाजपा की सत्ता का पेड़ उसने अपने मेहनत से लगाया है तो उससे मिलने वाले सत्ता  का स्वाद किसी और को कैसे चखने देंगे। राजनीति से दूर नितांत पारिवारिक माहौल में भी उन्होंने जिस तरीके से अपनी बात प्रतीक के माध्यम से की उससे उन्होंने सत्ता की स्वाद चखने के लिए लालायित पार्टी के भीतर ही कथित रूप से लॉबिंग कर रहे अपने विरोधी नेताओं को संकेत दिया उसे एक परिपक्व हो चुके राजनीतिक नेता के अपनी बात रखने के बेहतर तरीके के रूप में भी देखा जा सकता है।
बता दें कि पिछले 15 दिनों से मध्य प्रदेश के सिर्फ भाजपा नेताओं में आपसी मेल मुलाकात और बंद कमरे में राजनीतिक चर्चा का दौर चल रहा है। जिसे मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिशों के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन  गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इसे भले ही सिरे से खारिज कर दिया और सोशल मीडिया के विश्वविद्यालय से निकली खबर बता दिया ,लेकिन प्रदेश की राजनीति में रुचि रखने वाले , इसे नजदीक से समझने वाले और समय पर इसकी समीक्षा करने वाले लोग अभी भी इन कोशिशों की गवाही दे रहे हैं। अब तो यहां तक कहा जा रहा है कि यदि पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व यदि प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की बात करेंगे तो शिवराज सिंह चौहान और उनकी पसंद माने जाने वाले केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्  सिंह तोमर के नाम पर ही विचार करेंगे। ऐसे में इस तथाकथित कोशिश में लगे नेताओं को निराशा के सिवा कुछ भी हासिल नहीं हो सकेगा.
उमा ने लगाया था फलदार वृक्ष
        जब बात पेड़ लगाने ,उसमें फल लगने और स्वाद चखने की हो रही है तो इस बात का भी उल्लेख जरूर होना चाहिए की 2003 में साध्वी उमा भारती ने लोकप्रियता की लगातार सीढ़ियां चल रही दिग्विजय सिंह की 10 वर्षीय कार्यकाल वाली सरकार को पटखनी देकर मध्यप्रदेश में भाजपा का फलदार वृक्ष लगाया था। लेकिन कुछ ही दिन फल का स्वाद चखने के बाद उमा भारती इसके स्वाद के लिए तरस गई। अल्प समय के लिए इसका स्वाद पहले स्व बाबूलाल गौर ने चखा अब इसका मीठा फल लंबे समय से शिवराज सिंह चौहान अकेले ही खा रहे हैं। हां यह बात भी अलग है की कुछ समय के लिए इसका स्वाद लेने का अवसर कमलनाथ को भी मिला था किंतु इसे उनके ही दल के प्रथम पंक्ति के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खट्टा कर दिया। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शादी उमा भारती के नेतृत्व में 2003 में भाजपा ने पहली बार 230 में से 173 सीटे पार्टी ने जीती थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुए 3 चुनाव में भाजपा इस आंकड़ा को नहीं छू पाई।

 O   जब मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सक्रियता और कार्यकर्ताओं की मेहनत के बल पर प्रदेश की भाजपा सरकार को शिखर पर पहुंचाया है और अब जब उसके बेहतर परिणाम सामने आने लगे हैं तो इसका लाभ प्रदेश की जनता के साथ मिलकर शिवराज को ही मिलना चाहिए।
-----अनिल मोघे -वरिष्ठ स्वयंसेवक आर एस एस
 0  शिवराज सिंह चौहान 2005 से प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं इतने लंबे राजनीतिक अनुभव और सूझ-बूझ के चलते ही उन्होंने अपने कई आलोचकों और प्रतिस्पर्धी यों को मात दी है पिछले 1 सप्ताह से चल रही राजनीतिक उठापटक के बाद अचानक  सपत्नीक पचमढ़ी यात्रा और वह भी वर्षों पुराने वट वृक्ष  की छाव में अपनी फोटो जारी करना इस बात का घोतक है कि शिवराज इस फोटो के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं की वटवृक्ष की तरह प्रदेश में भी अभी उनकी जड़ें काफी मजबूत है सत्ता  परिवर्तन इतना सरल नही है जितना विपक्षी और विरोधी समझ रहे रहे है।
------कृष्णमोहन झा-राजनीतिक विश्लेषक

-लेखक भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं।

Post by-Deepak Kankar

न्यूज़ सोर्स : ख़िलावन चंद्राकर जी भोपाल