साँची(रायसेन) से देवेंद्र तिवारी

सांची एक विश्व ऐतिहासिक पर्यटक स्थल के रूप में विख्यात है परन्तु यहां स्थानीय प्रशासन का जिम्मा उठाने वाली नगर परिषद के इन दिनों हाल बेहाल है नगर परिषद में न तो कोई अधिकारी ही मिलता न ही कोई समस्या सुनने वाला ही मिल पाता है जो मौजूद रहते हैं उनकी मनमानी से न केवल जनता परेशान हैं बल्कि छोटे कर्मचारियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है । वैसे भी यह नगर परिषद सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय की स्थिति बनी हुई है।
 जानकारी के अनुसार इन दिनों इस विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल की नगर परिषद के हाल बेहाल बने हुए हैं लगभग साढ़े तीन साल से अधिक का समय यहां की निर्वाचित परिषद के विदा हुए हो चुका है तबसे ही यह नगर परिषद भगवान भरोसे चल रही है भले सरकारें बड़ी बड़ी धींग भरे परन्तु धरातल पर हालात बद से बद्तर हो चुके हैं जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है वैसे इन दिनों लंबे समय से इस परिषद के अध्यक्ष का दायित्व एसडीएम सम्हाल रहे हैं तथा सी एम ओ का दायित्व जिला परियोजना अधिकारी नगरीय प्रशासन विकास विभाग के जिम्मे सौंपा गया है  तब इस परिषद की समस्या को देखने सुनने की फुर्सत प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं मिल पा रही है अधिक तर अधिकारियों की कुर्सी खाली नजर आती है लोग अपनी समस्या के समाधान के लिए यहां आते हैं परन्तु समस्या सुनने देखने वाला कोई जिम्मेदार न मिलने से परेशानी उठानी पड़ती है और तो और इस परिषद में मुख्य लेखापाल के पद पर भी ऐसे एक स्थापना सम्हालने वाले लगभग इस नप में जमे तीस साल से बाबू के जिम्मे सौंपा गया है जिससे यहां काम करने वाले लोगों की फाइलें भी अटका के रखने का चलन बढ़ गया है तथा लोगों से व्यवहार भी ठीक नहीं बताया जाता । बताया जाता है वर्षों पूर्व राजनयिक लोगों ने इस व्यक्ति को दैनिक वेतनभोगी के रूप में यहां पदस्थ किया था परन्तु यहां पदस्थ रहते हुए स्थाई नौकरी की जुगाड जमा डाली तथा मनमर्जी के काम शुरू कर दिए । यहां के कर्मचारियों ने भी दबी जबान से बताया कि हर महीने पी एफ के रूप में उनकी राशि तो वेतन से कटौती कर दी जाती है परन्तु न तो इनके खातों में ही डाली जाती न ही जमा की राशि की पासबुक ही इन्हें दी जाती जब कर्मचारी इन राशियों की बात करते हैं तो कम्प्यूटर में दिखाई देने का हवाला देकर टाल दिया जाता है ऐसे लगभग इस परिषद में पंद्रह पंद्रह साल पुराने अस्थाई रूप से कर्मचारी अपनी सेवाएं देने में जुटे हुए हैं तब कम वेतन उसपर भी राशि काटकर उनको वापस लोटाने में हीलाहवाली कहीं न कहीं संदेहास्पद बनकर रह गया है तीस साल से जमे एक साधारण लिपिक को लेखापाल जैसे प्रमुख पद पर बेठाया जाना कहीं न कहीं संदेहास्पद बना हुआ है । हालांकि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देश दे दिए हैं कि किसी भी बाबू अधिकारी के पास फाइलें तीन दिन से अधिक रोककर नहीं रख सकेंगे जिससे शासकीय कार्य लेट लतीफ ने हो परन्तु इस परिषद में इस लिपिक के लेखापाल के रूप में पंद्रह पंद्रह दिन सरकारी अन्य दस्तावेज सहित भुगतान से संबंधी फाइल भी रोकने का उजागर चलन कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की बू को जन्म दे रहा है जिससे इस विख्यात नगर की परिषद संदेहास्पद बनकर रह गई है तथा लोगों को अपनी समस्या से जूझने मजबूर होना पड़ रहा है निर्वाचित परिषद ने होने से भगवान भरोसे इस परिषद को चलाया जा रहा है इतना ही नहीं नगर में विकास पूरी तरह ठप्प हो चुके हैं यहां तक कि नगर को गंदगी अतिक्रमण ने अपनी जकड़ में पूरी तरह ले रखा है जिसका खामियाजा सीधा नगर की जनता को भुगतना पड़ रहा है ।।

न्यूज़ सोर्स : देवेंद्र तिवारी साँची