सुरेन्द्र जैन धरसीवां

  गरीब मजदूरो की मेहनत से जो लेबर ठेकेदार लाखो रुपये कमाते हैं वह लॉक डाउन में बीमारियों के दौरान भी सावधानी नही बरत रहे हैं और सस्ते में काम चलाने के चक्कर मे छोटा हाथी जैंसे वाहनों में ठूंस ठूंसकर भरकर मजदूरो को काम पर ले जाना और वापस छोड़ने का काम कर रहे हैं जिससे उनके साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
  जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास सिलतरा उरला औद्योगिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटी बड़ी ओधोगिक इकाइयां हैं जहां अधिकांश पड़ोसी राज्यो के लेबर ठेकेदार लेबर सप्लाई का काम करते हैं और इसके बदले लाखों रुपये महीने कमाते हैं हालांकि की यह लेबर ठेकेदार कभी श्रमिको को उनके मेहनताने का निर्धारित दर पर भुगतान भी नही करते लेकिन बर्तमान में उन्हें लॉक डाउन ओर बीमारी को देखते हुए जो सावधानियां बरतनी चाहिए वह उसका भी पालन सही ढंग से नही कर रहे हैं ओर फेक्ट्रियो में लेबर सप्लाई करने सस्ते में काम निकालने छोटे मालवाहक वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है सिलतरा सहित आसपास के गांवो के उद्योगों में लेबर ठेकेदार नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर मजदूरों की जान जोखिम में डालकर उन्हें फेक्ट्रियो तक ले जाने व लाने का काम कर रहे हैं
  *सोशल डिस्टेंश का कोई पालन नहीं* 
जिस तरह लेबर ठेकेदार ओर कंपनियां श्रमिको को वाहनों में ठूंस ठूंसकर भरकर लाना ले जाना कर रहे हैं उससे कोसों दूर तक सोशल डिस्टेंश जैंसे नियमो का पालन भी होता दिखाई नही दे रहा है।
*हादसों को निमंत्रण*
जिस तरह मजदूरो को काम कराने छोटे मालवाहकों में भरकर उनके रहवासी स्थानों  से उधोगो तक लाना ले जाना किया जा रहा वह कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकते हैं।
*स्वयं के वाहनों से ड्यूटी जाने वालो को ईंधन नही फिर इन्हें कैंसे*
  आसपास के गांवो से जाकर उधोगो में काम करने वाले कई लोग अपने दुपहिया वाहनों फेक्ट्रियो में काम पर जाते हैं लेकिन उन्हें डीजल पेट्रोल पंप पर ईंधन नही मिलता तो आख़िर मजदूरो को ठूंस ठूंसकर भरकर ले जाने वाले मालवाहकों को हर समय ईंधन कहाँ से ओर केंसे मिल रहा है ये समझ से परे है।

न्यूज़ सोर्स : सुरेन्द्र जैन धरसीवां