indiacitynews.com

सांची(रायसेन) से देवेंद्र तिवारी

वैसे तो नवावी दौर में ग्राम कोटवार को कोतवाल के रूप में जाना जाता था तब गांवों की समस्या गांव में कोतवाल ही सुलझा लेते थे धीरे धीरे देश आजाद हुआ देश का कायाकल्प बदल गया परन्तु आज भी ग्राम कोटवार राजस्व विभाग का बंधुआ मजदूरों जैसे हालात से छुटकारा नहीं पा सका । शासन द्वारा इन्हें दी जानेवाली सुविधाएं न के बराबर रहती है जिन्हें हजारों लाखों रुपए शासन से वेतन के रूप में मिलते हैं उन्हें कम पड़ जाते हैं तब कोटवारों को मात्र 400/ मासिक वेतन ही मिल पा रहा है ।
जानकारी के अनुसार राजस्व विभाग में ग्राम कोटवार जो गांव चौकीदार भी कहलाते हैं रात-दिन मुस्तैद रहते हैं तथा राजस्व विभाग के अधीन रहकर शासन के आदेशानुसार अपने कर्तव्य का निर्वहन करते दिखाई दे जाते हैं इन कोटवारों को शासन इनके मेहनत के बदले शासकीय भूमि आवंटित कर देता है जिसपर यह कृषि कर अपना भरण पोषण करते हैं परन्तु सरकारी रूप से अनेक चौकीदार ऐसे भी होते हैं जिन्हें दस एकड़ कृषि भूमि रिकार्ड में दर्ज तो कर ली जाती है परन्तु मौकौ पर यह भूमि दो-चार एकड़ ही रह पाती है उस सरकारी आवंटित भूमि पर गांव के दबंग लोग कब्जा कर इन्हें बेदखल कर देते हैं जिन्हें दस एकड़ भूमि आवंटित की जाती है उन्हें वेतन के रूप में मात्र 400/ रुपए ही शासन देता है तथा जिन्हें दस एकड़ से कम भूमि आवंटित होती है उन्हें शासन एक हजार रुपए वेतन के रूप में देता है तथा जिन चौकीदारों को शासन भूमि आवंटित नहीं कर पाता उन्हें 2000/ रुपए मात्र देता है जबकि इन कोटवारों के जिम्मे चौबीस घंटे बंधुआ मजदूरों की तरह काम पर लगाते रखा जाता है तब आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन कोटवारों को अपना व अपने परिवार के पालन पोषण की गंभीर समस्या से किस प्रकार जूझना पड़ता होगा इस ओर न तो शासन न ही प्रशासन ध्यान दें पाता है ।जब कभी गांव में अशांति होती है तब चौकीदार तैनात जब कहीं आगजनी हो तो चौकीदार आगे जब दंगा बलवा जैसी घटनाएं घटित हो तो चौकीदार आगे कहीं हड़ताल धरना प्रदर्शन हो तो चौकीदार आगे विभिन्न विवाद हो तो भी चौकीदार यहां तक कि देश में होने वाले विभिन्न मतदानो में भी इन्हे विशेष अधिकारी बनाकर तैनाती कर दी जाती है यह सययाऔ से जूझने वाले कोटवारों की हालत आज देश को लगभग 75 से अधिक का लंबा अंतराल बीतने के बाद भी दयनीय बनी हुई है जबकि शासकीय कर्मचारी अधिकारी हजारों रुपए की वैतन लेकर भी शासन के रात-दिन काम नहीं कर पाते देश आजाद होने के बाद सभी के दिन बदल गये परन्तु इन ग्राम कोटवार के साथ शासन प्रशासन द्वारा किया जाने वाला बर्ताव आज भी अंग्रेजी शासन की याद ताजा करता है जो राजस्व विभाग भूमि मालिकों के विवादों का निपटारा करने का दंभ भरता है अपने ही ग्रामचौकीदारो की शासन स्तर पर आवंटित भूमि दबंगों के कब्जो से नहीं छुड़ा पाता । तथा चौकीदार को मात्र चारसो रुपए मासिक वेतन के रूप में देकर पल्ला झाड़ लेता है ऐसे मामले क ई गांव में सुनने को मिल जाते हैं जहां चौकीदारों को आवंटित भूमि पर दबंग मजे मार रहे हैं तथा जिन्हें शासन एक हजार रुपए मासिक वेतन के रूप में देता है तथा एक से पांच एकड़ भूमि आवंटित करता है उससे इनका गुजारा हो पाता है या नहीं शायद न तो शासन न ही प्रशासन की नजर पहुंच पाती होगी जबकि राजस्व विभाग विभिन्न प्रकार के नोटिस सम्मनो की तामील भी इन्ही चौकीदारों के माध्यम से ही करवाते देखे जाते हैं तथा भूमि हीन चौकीदारों को शासन मात्र दो हजार रुपए ही दे पाता है जो कलेक्टर रेट से भी बहुत कम होता है तब इस अंधी बढ़ी मंहगाई में वह रात-दिन जुटे रहने वाले चौकीदारों की ओर किसी की नजर पहुंच पा रही होगी । जबकि शासन करने वाले अपने वेतन भत्तों के रूप में लाखों रुपए ले रहे हो तथा प्रशासन चलाने वाले हजारों लाखों रुपए लेने के बाद भी लालसा खत्म न हो पाती हो तब उन्हें इन कोटवारों की दशा भी नजर न आए रही हो तब इनके वेतन अंग्रेजी हुकूमत की याद ताजा करते हैं । टप्पा तहसील कार्यालय सांची पर तैनात ग्राम कोटवार कमलसिंह दरगंवां  सीता राम ऐरन रामकिशन सुनारी सलामतपुर भैया लाल बेरखेड़ी घाट सोमतसिंह पिपरिया खुर्द ने बताया कि हमने अनेक बार अधिकारियों से अपनी समस्या बताई परन्तु कोई समाधान नहीं हो सका । वर्ष 2007 में प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हम सभी प्रदेशभर के कोटवार महापंचायत आयोजित की गई थी तब उन्होंने आश्वासन दिया था कि चौकीदारों को आवंटित शासकीय भूमि से दबंगों के कब्जो से मुक्त की जाये तथा वेतन बढ़ाते जाएं अन्य समस्याओं का समाधान किया जाये परन्तु आश्वासन के बाद भी कोई कारगर कदम नहीं उठाए जा सके । उन्होंने बताया कि हम सभी चौकीदारों को नवावी दौर के शासन काल के अनुसार शासन द्वारा हमें आवंटित कृषि भूमि का मालिकाना हक प्रदान किया जाये । तथा हमारे वेतन जिससे हमारे तथा हमारे परिवार का इस बढ़ी मंहगाई में गुजर नहीं हो पाता है वेतन बढ़ाते जाएं । तथा हम लोगों को भी चौबीस घंटे शासन के आदेशानुसार कार्य में जुटे रहते हैं हमें हमारी सुरक्षा के लिए शासन बंदूक प्रदान करें जिससे हम लोग अपने गांव की सुरक्षा निर्भीक होकर कर सके तथा अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा कर सके ।

न्यूज़ सोर्स : देवेंद्र तिवारी साँची