-शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले/वतन पे मरनेवालों का यही बाक़ी निशां होगा

भोपाल। आज़ादी से पहले के हिंदुस्तान में पत्रकारिता के सबसे सशक्त हस्ताक्षर माधवराव सप्रे के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करने और उसे जन जन तक पहुंचाने का संकल्प आज  लिया गया । स्वर्गीय सप्रे जी की जन्मस्थली मध्यप्रदेश के दमोह ज़िले के पथरिया कस्बे में मुख्य समारोह हुआ । मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री श्री प्रहलाद पटेल थे । आयोजन में वरिष्ठ पत्रकार पदमश्री विजय दत्त श्रीधर, वरिष्ठ पत्रकार व फिल्मकार राजेश बादल ,साहित्यकार श्री श्यामसुंदर दुबे और सीसीईआरटी की चेयरमैन सुश्री हेमलता मोहन भी थीं।समारोह का संचालन इंदिरागांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक विजय शंकर शुक्ल ने किया ।
आयोजन में मुख्यअतिथि श्री पटेल ने कहा कि स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं । इनमें आजादी के आंदोलन की घटनाओं और उनमें शामिल रहे महापुरुषों के योगदान को याद किया जाएगा । इस कड़ी में पथरिया का यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है ।स्वर्गीय सप्रे जी ने  निष्काम योगी के रूप में अपने जीवन को देश को समर्पित कर दिया । ऐसे श्रद्धा पुरुष को नमन । श्री पटेल ने कहा कि साल भर तक ऐसे गुमनाम क्रांति कारियों और शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम होंगे,जो वक्त के साथ भुला दिए गए ।
पदमश्री विजयदत्त श्रीधर ने सप्रे जी के जीवन से जुड़ी तमाम घटनाओं की विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने माखनलाल चतुर्वेदी, द्वारिका प्रसाद मिश्र, और सेठ गोविंददास जैसी अनेक विभूतियों को  तराशा और स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई पहचान दी।उन्होंने कहा कि भोपाल का माधवराव सप्रे राष्ट्रीय संग्रहालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुर्लभ समाचार पत्र पत्रिकाओं का एक बड़ा केंद्र बन गया है । इसमें लाखों दस्तावेज,माधव राव सप्रे से लेकर धर्मवीर भारती और दुष्यंत कुमार तक की यादें सुरक्षित हैं । अनेक महान पुरुषों की पांडुलिपियां और दुर्लभ सामग्री से हज़ारों शोधार्थी लाभ उठा चुके हैं । शीघ्र ही सप्रे जी की स्मृति में अगला बड़ा कार्यक्रम संग्रहालय में किया जाएगा ।
वरिष्ठ पत्रकार ,फिल्मकार और राज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने कहा कि पथरिया देश भर के पत्रकारों के लिए तीर्थ से कम नहीं है । इस पर बुंदेलखंड का हर नागरिक गर्व कर सकता है । उन्होंने कहा कि सप्रे जी ने भारत में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की ।उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए भी अभियान छेड़ा । ये दोनों आंदोलन बाद में महात्मा गांधी ने उठाए और उन्हें देश भर में विस्तार दिया ।गोरी हुकूमत उनके लेखन से परेशान रही ,लेकिन माधवराव जी अपना काम करते रहे । 
साहित्यकार श्यामसुंदर दुबे ने पथरिया से सप्रे जी के रिश्ते को रेखांकित करते हुए अनेक संस्मरण सुनाए । कार्यक्रम में सपरे जी पर केंद्रित पांच विशेष प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया । इसके अलावा माधव राव सप्रे संग्रहालय के सौजन्य से सप्रे जी के जीवन वृत्त को दर्शाते हुए एक चित्र दीर्घा का अवलोकन भी अतिथियों ने किया । समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता,बुद्धिजीवी, पत्रकार और साहित्यकार उपस्थित थे ।

न्यूज़ सोर्स : श्री राजेश बादल जी