बहेसर जाने वाले ग्रामीण भी होते रहे हलाकान

      सुरेन्द्र जैन धरसीवां

ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा के फेस टू की सडको पर उधोगो का माल लाने ले जाने वाले वाहनों का बेतरतीब ढंग से खड़े होना या हूँ कहें सड़को पर कब्जा होना ग्रामीणो के लिए मुसीबत की जड़ बन गया है मंगलवार को भी यहां सुबह से ही जाम लगा रहा जिसका खामियाजा आसपास के गांवो के ग्रामीणो को भी भुगतना पड़ा।
    ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा के फेस टू में हाइवे से ओधोगिक क्षेत्र होते हुए ग्राम बहेसर,मुरेठी सहित दर्जनो गांव जुड़े हुए हैं जहां से ग्रामीण अपने अपने कामो से सांकरा सिलतरा धरसीवां रायपुर आदि स्थानों पर आना जाना करते हैं वही उधोगो में काम करने वालों को भी अपने अपने गंतव्य तक समय पर पहुचना होता है लेकिन आये दिन ओधोगिक क्षेत्र की कुछ सडको पर फेक्ट्रियो का माल लाने ले जाने वाले मालवाहक वाहनों का कब्जा हो जाता है जिससे जरूरी काम से गांवो से आवागमन करने वालों को भी घण्टों जाम में फंसे रहना पड़ता है।
    *बहेसर मार्ग पर अधिक दिक्कत*
   ओधोगिक क्षेत्र के महेंद्रा चौक से बहेसर गांव जाने वाले मार्ग पर सर्वाधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है यहां आरती स्पंज व नन्दन स्टील फेक्ट्री के सामने मालवाहक वाहनों का जमावड़ा होने से रास्ता पूरी तरह बन्द हो जाता है ग्रामीण दुपहिया से भी नही निकल पाते।
    मंगलबार को भी सुबह से ही यहां बेतरतीब ढंग से खड़े मालवाक वाहनों के कारण जाम लगा रहा जिसमे बहेसर जाने वाले चार पहिया में सवार परिवारों को भी घण्टों जाम में फंसे रहना पड़ा।
*अधिकांश उधोगो ने आगे बढ़ा ली बाउंड्री काट दिए वृक्ष*
    ओधोगिक क्षेत्र में इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि अधिकांश उधोगो ने हरे भरे हजारों बबूल के वृक्षों को काटकर अब अपनी अपनी बाउंड्री ओर आगे बढ़ा ली है इस कारण सड़क किनारे इतनी जगह नही बची की मालवाहक सड़क किनारे खड़े हों ओर मुख्य मार्ग अवरुद्ध न हो।
*होनी चाहिए हर प्लांट की नपती*
    आये दिन होने वाली समस्या से निजात दिलाने राज्य सरकार को कोई ठोस कदम उठाने की जरूरत है यदि सरकार ओधोगिक क्षेत्र सिलतरा व उरला के प्रत्येक उधोग की जमीन की नपती कराए की उन्होंने कितनी जमीन एकेवीएन से या किसानों से खरीदी पर वह बर्तमान में कितने पर काबिज हैं इसका सीमांकन कराकर जिन्होंने जमीन अधिक दबाई है उसे मुक्त कराया जाए तो शायद कुछ हल निकल सकता है।
   साथ ही उधोग अपने यहां आने वाले वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था खुद करें इस दिशा में प्रयास हों तो भी समस्या का स्थायी हल हो सकता है।

न्यूज़ सोर्स : सुरेन्द्र जैन धरसीवां