माइग्रेन के दौरान आप जो कष्टदायी दर्द अनुभव करते हैं, वो सचमुच नर्वस है. गंभीर सिरदर्द और प्रेडिक्शन से ज्यादा समय तक रह सकते हैं. माइग्रेन को ठीक करने के लिए कोई एक खास इलाज नहीं है, लेकिन कुछ जीवनशैली की आदतें और एक स्वस्थ आहार इन सिरदर्द को दूर रखने में मदद कर सकता है.

यहां कुछ फूड आइटम्स हैं जो माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं जबकि दूसरे फूड आइटम्स हैं जो उन्हें रोकने में मदद कर सकते हैं. ये फूड आइटम्स आपके माइग्रेन को स्थायी रूप से दूर नहीं करेंगे, लेकिन ये निश्चित रूप से दर्द से निपटने और इसे कम प्रभावी रखने में मदद करेंगे. माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसे जीन से देखा जा सकता है या तनाव और हार्मोन जैसे अन्य कारक हो सकते हैं.
अगर आप माइग्रेन से पीड़ित हैं तो ये ऐसे फूड आइटम्स हैं जिन्हें आपको अपने आहार में शामिल करना चाहिए.

सैल्मन

ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली फैटी फिश माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए बेहद फायदेमंद होती है. ये माइग्रेन की घटना को कम करने में मदद करता है.

नट्स

मेवे मैग्नीशियम और दूसरे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों और न्यूट्रिएंट्स से भरे होते हैं जो आपके शरीर के साथ-साथ माइग्रेन के इलाज में भी महत्वपूर्ण होते हैं. नट्स का सेवन आप हेल्दी स्नैक आइटम के रूप में कर सकते हैं. उन्हें हमेशा संभाल कर रखें या अपने बैग में रखें. बादाम, काजू, अखरोट और कद्दू के बीज जैसे मेवे अच्छे ऑप्शन्स हैं.

पालक

माइग्रेन के लिए हरी और पत्तेदार सब्जियां खास तौर से अच्छी होती हैं. उनके कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं और पालक फोलिक एसिड और विटामिन बी के साथ-साथ मैग्नीशियम का एक अच्छा सोर्स है. ये माइग्रेन से लड़ने में मदद करते हैं.

जई का दलिया

अपने ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल और नियमित रखने के लिए, दलिया वास्तव में मदद करता है. ये माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होते हैं. आप अपने नियमित अनाज के कटोरे के साथ नाश्ते के रूप में दलिया खा सकते हैं और इसमें ताजे फल मिला सकते हैं.

पानी

अपने माइग्रेन के लिए सबसे अच्छे उपाय के रूप में पानी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें. माइग्रेन के सिरदर्द से निपटने के लिए खुद को हाइड्रेट रखना बहुत ही जरूरी है. रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना जरूरी है.

माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या आए दिन लोग झेलते रहते हैं. आज तकरीबन-तकरीबन लोगों को ये समस्या है ही लेकिन इसका अगर सही समय पर इलाज किया गया तो ये आसानी से ठीक हो सकते हैं और अगर नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं.