इंदौर. इंदौर में चल रहे एंटी-भूमाफिया अभियान में बड़ी गड़ीबड़ी सामने आई है. 12 साल में जिले की 112 सहकारी संस्थाएं गायब हो गई हैं. अब प्रशासन एक कमेटी बनाकर इनकी जांच कराएगा. गायब संस्थाओं की वजह से सरकार के माफिया मुक्त प्रदेश अभियान पर असर पड़ सकता है.

जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन, पुलिस और सहकारिता विभाग द्वारा 2009 में भूमाफिया के खिलाफ अभियान चलाया गया था. उस वक्त सहकारिता विभाग के रिकॉर्ड में 970 संस्थाएं रजिस्टर्ड थीं. लेकिन, इस बार जब अभियान चालू हुआ तो 112 संस्थाएं कम निकलीं.

विभाग के पास नहीं है कोई भी जानकारी

बताय जाता है कि सहकारिता विभाग के पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि ये कहां गईं, इनकी जमीन कहां है, संचालक मंडल का क्या हुआ, सदस्यों को प्लॉट मिले या नहीं. पिछली बार जब माफिया के खिलाफ अभियान चलाया गया था उस वक्त उन पर FIR भी कराई गई थीं. इस दौरान जानकारी दी गई थी कि 970 संस्थाओं का रिकॉर्ड है. इस बार कलेक्टर की अध्यक्षता में जब मीडिया को जानकरी दी ज रही थी तो केवल 858 ही संस्थाएं रजिस्टर्ड होने की बात कही गई. इनमें से भी 161 संस्थाओं का परिसमापन हो गया या बंद हो गईं.


पुरानी संस्थाएं इस बार भी शामिल

12 साल पहले माफिया अभियान में 970 में से जिन 10 संस्थाओं को चुना था, वही संस्थाएं इस बार भी टारगेट पर हैं. जबकि सहकारिता विभाग के हिसाब से 128 संस्थाओं में सदस्य प्लॉट न मिलने, कब्जा न होने, रजिस्ट्री नहीं किए जाने, वरीयता सूची जारी नहीं किए जाने की समस्या से परेशान हैं. जाग्रति, देवी अहिल्या, मजदूर पंचायत, कविता, गीता, डाकतार, श्रीराम, जयहिंद हाउसिंग सोसायटी 2009 की माफिया मुहिम में भी शामिल की गई थीं. इस बार भी इन्हीं संस्थाओं को लिया गया है.

सहकारिता विभाग के पीएस ने भेजी कमेटी

इस बार प्रशासन, पुलिस ने तीन-तीन संस्थाओं का निपटारा करने की बात कही है, लेकिन इस हिसाब से अन्य संस्थाओं का नंबर लंबे समय बाद आएगा. सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने इंदौर में चल रही मुहिम और विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई पर नजर रखने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी भी इंदौर भेजी है.

हर पहलू की जांच करेगी कमेटी

यह कमेटी जिन संस्थाओं की जांच चल रही है, दागी संस्थाओं को बरसों से कैसे केवल तारीख ही मिल रही है. उनके खिलाफ चल रही सुनवाई कैसे खत्म नहीं हो रही, इसके सहित कामकाज पर भी नजर रखेगी. इसके अलावा कमेटी इस बात की भी जांच करेगी कि 2009 की मुहिम में 970 संस्थाएं रिकॉर्ड पर थीं तो इस दफा 858 कैसे रह गईं?