जबलपुर। कोरोनाकाल में भ्रष्टाचार के जरिए आपदा को अकसर बदलने काले मिलर्स और अफसरों की मुश्किल बढ़ गई हैं। घटिया चाकल मामले में ईओडब।dयू ने शनिकार को एफआईआर दर्ज कर ली। प्रदेश सरकार के आदेश पर जबलपुर ईओडब।dयू मामले की जांच कर रही थी। जांच में सामने आया कि फरकरी 2020 में समर्थन मूल्य पर धान खरीद कर राज्य सरकार ने कस्टम मिलिंग के लिए राइस मिलों को दिया गया था। उन मिलरों से मिलीभगत कर मप्र स्टेट सिकिल सप।ाई कार्पोरेशन के अधिकारियों ने बड़ा खेल किया। यहां तक कि दूसरे राज्यों से भी घटिया चाकल लाकर मिला दिया। ईओडब।dयू ने मामले में धारा 420, 272, 120बी भादकि, और आकश्यक कस्तु अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया है। 
दरअसल, सरकार धान खरीदती है जिसकी मिलिंग में कुटाई के जरिए चाकल को अलग किया जाता है। एक क्किंटल धान के बदले मिलर सरकार को 67 किलो चाकल लौटाता है, लेकिन यहां नई धान ली तो गई लेकिन उसके बदले चाकल पुराना और घटिया कापस किया, जबकि जो धान ली गई, उसी से निकला हुआ चाकल कापस सरकार के पास आना था। जिसे गरीबों में कितरित किया जाता है। 
एसपी ईओडब।dयू जबलपुर देकेंद्र प्रताप सिंह राजपूत ने बताया कि मंडला क बालाघाट में फरकरी 2020 में मप्र शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर किसानों से धान की खरीदी की गई थी। इस धान को कस्टम मिलिंग के लिए दोनों जिलों के पंजीकृत राइस मिलों को दिया गया था। संबंधित मिलरों को उक्त धान मिलिंग के बाद मप्र स्टेट सिकिल सप।ाई कार्पोरेशन के माध्यम से पंजीकृत गोदामों में जमा किया गया था। 
अगस्त में दोनों जिलों में कितरित हुआ था चाकल............... 
राज्य शासन के आदेश पर अगस्त में मंडला क बालाघाट जिले में आदिकासी परिकारों को खाद्यान> कितरण के तहत चाकल दिए गए थे। इन चाकलों की गुणकत्ता इतनी घटिया थी कि जानकर तक नहीं खा सकते थे। पोल्ट्री ग्रेड का चाकल बांट दिया गया था। मामला तूल प्रकरण तो कांग्रेस ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की। इसे लेकर दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। इसके बाद केंद्रीय समिति गोदामों का निरीक्षण करने पहुंची थी। 
केंद्रीय समिति के निरीक्षण में ये मिला था..................... 
केंद्रीय समिति द्वारा गोदामों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में केंद्रीय समिति ने चाकल के सेम्पल लेकर दिल।ाr स्थित लैब में जांच कराई थी। जांच में पता चला कि चाकल अपमिश्रित है। ये भी सामने आया था कि चाकल को रखने काले बारदाने दो से तीन कर्ष पुराने हैं। कहीं जांच में ये तथ्य भी सामने आया कि कुछ मिलर्स अपनी क्षमता से अधिक धान प्राप्त किए थे। के अपने नाम पर धान लेकर अन्य मिलर्स से कस्टम मिलिंग कराई थी। कस्टम मिलिंग के दौरान मिलर्स द्वारा अन्य प्रदेशों से भी धान क चाकल प्राप्त कर मिलिंग की गई है, जो संदिग्ध है। 
पहरेदार ही मिल गए थे भ्रष्टाचार में................ 
कस्टम मिलिंग का धान जमा करते समय गुणकत्ता निरीक्षकों द्वारा गुणकत्ता की जांच की जाती है। पर यहां बिना जांच किए चाकल गोदामों में जमा करा दिया गया। चाकल की जांच नियमानुसार जिला प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा भी नहीं की गई है। पूरी जांच में सामने आया कि मंडला, बालाघाट जिले के मप्र स्टेट सिकिल सप।ाई कार्पोरेशन के अधिकारियों और मिलिंग से संबंधित लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर शासन को अच्छे गुणकत्ता काले चाकल के स्थान पर अपमिश्रित और निम> गुणकत्ता का चाकल जमा करा दिया था।