मई में मेरी मामी दीपा कनोजिया की तबीयत बिगड़ी। ऑक्सीजन लेवल अचानक तेजी से घटा। सागर में ही एक अस्पताल में ले गए जहां कोरोना का ट्रीटमेंट दिया जाने लगा। पता चला कि उन्हें तो ब्लैक फंगस भी है। डॉक्टरों ने भोपाल शिफ्ट करने के लिए कह दिया। हमें लगा कि बड़े शहर में अच्छे से इलाज हो जाएगा। बगैर देरी किए हमीदिया में 22 मई को भर्ती करा दिया। बावजूद, कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट को लेकर बहुत लापरवाही की गई। हम पूछते ही रह गए कि निगेटिव रिपोर्ट आई या नहीं। आया तो क्या आया। हमें कोई ठीक से जवाब नहीं देता या फिर देता ही नहीं। हम रिपोर्ट का इंतजार करते रहे क्योंकि वह रिपोर्ट आने पर ही ब्लैक फंगस का ऑपरेशन हो सकता था। ऑपरेशन की तारीख और रिपोर्ट तो नहीं आई लेकिन 1 जून को हमने मामी को खो दिया। सरकार से यही चाहते हैं कि तड़पते हुए ऐसी जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि अस्पताल के पास उपकरण नहीं थे। उम्मीद है कि आगे ऐसी कोई जान नहीं जाएगी।

दैनिक भास्कर के जरिए सरकार तक यह बात पहुंचाना चाहता है दीपा कनोजिया का भांजा देवेंद्र उन्होंने कहा कि सरकार संक्रमित ब्लैक फंगस के पीड़ितों की भी सर्जरी की सुविधा का इंतजाम करें।

अभी भी 3 संक्रमित भर्ती ऑपरेशन के इंतजार में

बता दें अस्पताल में पिछले 20 दिनों में ऐसे तीन से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई है। अभी अस्पताल में कोरोना संक्रमित ब्लैक फंगस से पीड़ित 3 मरीज भर्ती हैं। इस मामले की पड़ताल में पता चला कि हमीदिया अस्पताल में ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों के लिए मई माह में पीक के समय तीन ओटी में लगातार ऑपरेशन चले। लेकिन यह सब ऑपरेशन ब्लैक फंगस से संक्रमित नॉन कोविड मरीजों के थे। कोरोना संक्रमित ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन के लिए उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने का इंतजार किया गया।

ऐसा नहीं है कि कोरोना संक्रमित ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज के लिए ओटी उपलब्ध नहीं थी। कोरोना ए ब्लॉक में ओटी उपलब्ध है, लेकिन ओटी में ऑपरेशन करने के लिए एंडोस्कोपी, कैमरा समेत अन्य उपकरण ही नहीं है। इसकी डिमांड विभाग की तरफ से मई की शुरुआत में ही वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जा चुकी है, लेकिन उनकी तरफ से अब तक उपकरण ही उपलब्ध नहीं कराई गए। जिम्मेदारों की इसी उदासीनता के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है।

शनिवार को ब्लैक फंगस के 4 नए मरीज भर्ती हुए लेकिन वे निगेटिव हो चुके हैं

हमीदिया अस्पताल में अब तक करीब ब्लैक फंगस के 295 मरीज भर्ती हुए। इसमें से 35 मरीजों की मौत हो गई। 165 मरीज डिस्चार्ज हुए। अभी करीब 95 मरीज भर्ती हैं। इसमें 3 मरीज कोरोना के हैं। शनिवार को ब्लैक फंगस के 4 नए मरीज भर्ती हुए। अस्पताल में 10 मरीजों की आंख, करीब एक दर्जन की तालू और एक दर्जन का जबड़ा निकाला गया। इसके अलावा 10 मरीज की नाक की सर्जरी हुई है। अभी 4 मरीज की ही सर्जरी बाकी है।

यह बोले जिम्मेदार

इस मामले में हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक लोकेन्द्र दवे ने बताया कि हमीदिया अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों का तीन ओटी में लगातार ऑपरेशन किए गए। एक ओटी के उपकरण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके उपकरण खरीदी की प्रक्रिया वरिष्ठ कार्यालय से चल रही है।

हमने उपकरण के लिए प्रस्ताव भेजा है

वहीं, ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता सोनी ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीजों और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर दोनों के लिए रिस्क ज्यादा होता है। कोरोना संक्रमित मरीज अधिकतर खून पतला करने की दवा पर होते है। ऐसे में ऑपरेशन करने से ब्लीडिंग का खतरा हाेता है। हम ऐसे मरीजों को उनके निगेटिव होने तक दवा पर रखते हैं। हम संक्रमित मरीजों को नॉन कोविड ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों के ऑपरेशन की ओटी में ऑपरेशन नहीं कर सकते हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी रहता है। हमारे पास ऑपरेशन के लिए एक ही सेटअप था। कोविड मरीजों के ऑपरेशन के लिए उपकरण के लिए प्रस्ताव लिख कर मई माह में ही भेज दिया था।