हिमाचल हादसे का दर्दनाक असर, अंतिम संस्कार में फूट-फूटकर रोए लोग
दुर्ग/भिलाई: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के दुर्गम बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग पर हुए एक बेहद दर्दनाक और भीषण कार हादसे ने छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया है। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्सीडेंट में दो मासूम बच्चों समेत कुल आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में छत्तीसगढ़ के भिलाई (दुर्ग जिला) के रहने वाले एक ही हंसते-खेलते परिवार के चार सदस्य शामिल थे। हादसे के पांच दिन बाद जब विशेष एंबुलेंस के जरिए रायपुर हवाई अड्डे से चारों शव दुर्ग जिले के ग्राम कुथरेल पहुंचे, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। आईटी इंजीनियर अरविंद चंद्राकर, उनकी धर्मपत्नी प्राची, और उनके दो मासूम बेटों- दर्श व अक्षज का एक ही श्मशान घाट पर एक साथ अंतिम संस्कार किया गया, जिसे देख वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें छलक आईं।
500 मीटर गहरी खाई में समा गई गाड़ी, पूरा वंश खत्म
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना 29 मई 2026 की रात को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में घटित हुई, जहां पर्यटकों से भरी एक टैक्सी अचानक अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरे सर्पाकार खड्ड (खाई) में जा गिरी। भिलाई का यह चंद्राकर परिवार गर्मियों की छुट्टियां बिताने और पहाड़ों की वादियों का लुत्फ उठाने हिमाचल गया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इस भयावह हादसे में इस परिवार का पूरा वंश ही हमेशा के लिए खत्म हो गया। मंगलवार दोपहर को जब रायपुर एयरपोर्ट से चार अलग-अलग एंबुलेंस के काफिले में शवों को पैतृक गांव कुथरेल लाया गया, तो अंतिम दर्शन के लिए समूचे क्षेत्र से ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा।
गांव के इतिहास में पहली बार एक साथ उठीं 4 अर्थियां
स्थानीय बुजुर्गों और ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के सौ साल से भी पुराने इतिहास में ऐसा विचलित करने वाला मंजर कभी नहीं देखा गया, जब एक ही आंगन से एक साथ चार-चार अर्थियां निकली हों। श्मशान घाट में जब एक कतार में चार चिताएं सजाकर उन्हें मुखाग्नि दी गई, तो हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। गौरतलब है कि इस भीषण दुर्घटना में चंद्राकर परिवार के अलावा उनके साथ यात्रा कर रहे एक दूसरे परिवार के सदस्य पी.जी. कार्तिघायन, उनकी पत्नी मनीमाला, उनके बेटे नंदन और स्थानीय पहाड़ी टैक्सी चालक की भी दर्दनाक मौत हुई है।
बच्चों के खेल टूर्नामेंट के बाद साच पास घूमने निकला था परिवार
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अरविंद चंद्राकर बेंगलुरु (कर्नाटक) में एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में बतौर आईटी (IT) इंजीनियर कार्यरत थे। उनके बच्चे ताइक्वांडो खिलाड़ी थे और वे एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए थे। खेल प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद, दोनों मित्र परिवारों ने साच पास और आसपास के बर्फबारी वाले क्षेत्रों को एक्सप्लोर करने के लिए एक टैक्सी बुक की थी।
29 मई की रात को जब वे वापस लौट रहे थे, तभी कालावन क्षेत्र के तीखे मोड़ के पास घने कोहरे या तकनीकी खराबी के कारण गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे गहरी खाई में जा गिरी।
खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ियों के बीच चला रेस्क्यू ऑपरेशन
टक्कर और गिरावट इतनी जबरदस्त थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वाहन में सवार किसी भी व्यक्ति को संभलने का मौका नहीं मिला। जब देर रात तक परिवार का संपर्क टूट गया, तो परिजनों की सूचना पर जीपीएस (GPS) लोकेशन के आधार पर क्षतिग्रस्त वाहन को ट्रैक किया गया। इसके बाद चंबा जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने तुरंत संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
पहाड़ी क्षेत्र की अत्यधिक गहराई, सीधी ढलान और लगातार बदलते खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीम को नीचे उतरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आखिरकार, स्थानीय पहाड़ी युवाओं, पुलिस और प्रशासन के जवानों ने जान जोखिम में डालकर एक लंबी 'ह्यूमन चेन' (मानव श्रृंखला) बनाई और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सभी आठ शवों को खाई से बाहर निकाला। इस बड़ी त्रासदी के बाद रायपुर, भिलाई, और बेंगलुरु के तकनीकी जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

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